कश्मीर: भारत और चीन

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जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के एक वर्ष बाद चीन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिष?

कश्मीर: भारत और चीन

 

 

प्रीलिम्स के लिये

अनुच्छेद 370, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

मेन्स के लिये

कश्मीर को लेकर चीन का पक्ष और उसके निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के एक वर्ष बाद चीन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council-UNSC) में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया है।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है बीते वर्ष विशेष दर्जे की समाप्ति के बाद यह तीसरी बार हुआ है जब चीन ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समक्ष उठाया है, इससे पूर्व यह मुद्दा बीते वर्ष अगस्त माह में और इस वर्ष जनवरी माह में उठाया गया था, किंतु पिछले अवसरों की तरह इस बार भी चीन को कोई सफलता नहीं मिल सकी।

जम्मू-कश्मीर पर चीन का पक्ष

  • हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ‘चीन कश्मीर क्षेत्र की स्थिति पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और कश्मीर के मुद्दे पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है।
  • कश्मीर के मुद्दे पर अपने पक्ष को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर चीन हमेशा से तीन बातों पर ज़ोर देता हुआ आया है-
    • पहला यह कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच इतिहास का बचा हुआ एक विवाद है।
    • दूसरा यह कि कश्मीर क्षेत्र की यथास्थिति में कोई भी एकतरफा परिवर्तन पूर्ण रूप से अवैध और अमान्य है।
    • तीसरा और अंतिम यह कि कश्मीर क्षेत्र का मुद्दा संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और परामर्श के माध्यम से शांतिपूर्वक ढंग से हल होना चाहिये।

भारत ने क्या कहा?

  • चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे को उठाने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘चीन को इस मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है, और इसलिये चीन को अन्य देशों के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने से बचना चाहिये।
  • संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी. एस. तिरुमूर्ति ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की हालिया बैठक बंद कमरे में आयोजित पूर्ण रूप से एक अनौपचारिक बैठक थी, जिसका कोई भी रिकॉर्ड संग्रहित नहीं किया गया।’ 
  • भारत ने कई अवसरों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करना भारत का आंतरिक मामला था।

निहितार्थ

  • गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर को लेकर चीन की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है, पहले चीन यह कहते हुए अपनी तटस्थता पर बल देता था कि कश्मीर एक ऐतिहासिक मुद्दा है, जिसे भारत और पाकिस्तान द्वारा आपसी समन्वय के माध्यम से सुलझा जाना चाहिये।
  • हालाँकि बीते एक वर्ष में खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति के बाद से कश्मीर को लेकर चीन के पक्ष में काफी परिवर्तन आया है और वह स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान की ओर अधिक झुका हुआ दिखाई दे रहा है।
  • इस बीच चीन ने कई बार जम्मू-कश्मीर की स्थिति को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समक्ष उठाकर कश्मीर के मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की है।

जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की पहली वर्षगांठ 

  • संयोगवश यह पूरा घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर ही घटित हुआ। गौरतलब है कि बीते वर्ष 5 अगस्त के ही दिन केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाकर राज्य का विभाजन दो केंद्रशासित क्षेत्रों- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के रूप में कर दिया था। 
  • इसी के साथ जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान रद्द हो गया था और वहाँ भारतीय संविधान लागू हो गया था। वहीं जम्मू-कश्मीर के अलग झंडे की अवधारणा भी समाप्त हो गई।
  • राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करते हुए सरकार ने तर्क दिया था कि इस निर्णय के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में विकास कार्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • 5 अगस्त और उसके पश्चात् कश्मीर घाटी में हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया, इनमें से कई लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (Public Safety Act-PSA) के तहत हिरासत में लिया गया, जिसमें पहली बार राज्य के मुख्य धारा के नेता भी शामिल थे।
  • साथ ही क्षेत्र विशिष्ट में इंटरनेट सेवाएँ भी पूरी तरह से बंद कर दी गई थीं, जिन्हें अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं किया गया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट

  • मानवाधिकारों के मुद्दे पर हाल ही में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की एक रिपोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से जम्मू-कश्मीर में कार्यालय स्थापित करने का आग्रह किया गया है।
  • इसके अलावा संगठन ने सरकार से सभी राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं को नज़रबंदी से मुक्त करने और राज्य में 4G मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ बहाल करने का भी आह्वान किया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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