कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान ‘अघरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के शोधकर्त्??

कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन

 

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान ‘अघरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (Agharkar Research Institute- ARI) के शोधकर्त्ताओं द्वारा किये गये एक हालिया अध्ययन में यह पाया गया है कि कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन [Krishna-Godavari (KG) basin] में जमा मीथेन हाइड्रेट बायोजेनिक (Biogenic) मूल के हैं।

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प्रमुख बिंदु: 

यह अध्ययन DST-SERB युवा वैज्ञानिक परियोजना के एक भाग के रूप में आयोजित किया गया था जिसका शीर्षक ‘एलुसिडेटिंग द कम्युनिटी स्ट्रक्चर ऑफ मेंथोजेनिक आर्चेए इन मीथेन हाइड्रेट’ (Elucidating The Community Structure of Methanogenic Archaea in Methane Hydrate) था। 

मीथेन हाइड्रेट का निर्माण उस समय होता है जब महासागरों में उच्च दबाव एवं कम तापमान पर हाइड्रोजन-बांडेड जल एवं मीथेन गैस एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं।

मीथेन एक स्वच्छ एवं किफायती ईंधन है। माना जाता है कि एक घन मीटर मीथेन हाइड्रेट में 160-180 घन मीटर मीथेन होता है।

केजी बेसिन में मीथेन हाइड्रेट्स में मौजूद मीथेन दुनिया भर में उपलब्ध जीवाश्म ईंधन भंडार का दोगुना है। 

शोधकर्त्ताओं के अनुसार, कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन और अंडमान एवं महानदी के तट के पास बायोजेनिक मूल के मीथेन हाइड्रेट का निक्षेपण संबद्ध मिथोजेनिक समूह के अध्ययन के लिये आवश्यक है।

शोधकर्त्ताओं के अनुसार, अभी तक मीथेन हाइड्रेट वाले तलछट से जुड़े मिथेनोजेनिक (Methanogenic) समुदायों से संबंधित अत्यंत कम अन्वेषण हुए हैं। 

आण्विक एवं संवर्द्धन तकनीकों का उपयोग करने वाले इस अध्ययन से केजी बेसिन में अधिकतम मिथेनोजेनिक विविधता का पता चला है जो अंडमान द्वीपीय तट एवं महानदी बेसिनों की तुलना में यहाँ (केजी बेसिन) बायोजेनिक मीथेन के अधिक स्रोत होने की पुष्टि करता है। 

इस बेसिन में जमा होने वाला मीथेन हाइड्रेट एक समृद्ध स्रोत है जो मीथेन (एक प्राकृतिक गैस) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

मीथेन हाइड्रेट से संबंधित इस शोध को 'मरीन जीनोमिक्स' (Marine Genomics) नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

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