उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल

हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के पुलिस महानिदेशक को ‘उत्तरप्रदेश विशेष सुरक्षा बल’ के गठन हेतु आ?

उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल

 

प्रिलिम्स के लिये: 

उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

मेन्स के लिये:

सुरक्षा बल और आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक शक्तियाँ और मानवाधिकार

चर्चा में क्यों?

हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के पुलिस महानिदेशक को ‘उत्तरप्रदेश विशेष सुरक्षा बल’ के गठन हेतु आवश्यक रूप रेखा तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

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प्रमुख बिंदु:

  • गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 26 जून, 2020 को राज्य में महत्त्वपूर्ण भवनों और अन्य अवसंरचनाओं की सुरक्षा के लिये उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (Uttar Pradesh Special Security Force- UPSSF) के गठन का निर्णय लिया गया था।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा UPSSF की स्थापना का यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के  दिसंबर 2019 के एक आदेश के बाद आया है, जिसमें उच्च न्यायालय ने राज्य में सिविल न्यायालयों की सुरक्षा के संदर्भ में अपनी चिंता व्यक्त की थी।   

उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल

(Uttar Pradesh Special Security Force- UPSSF):  

  • UPSSF की स्थापना ‘उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल अधिनियम, 2020’ [Uttar Pradesh Special Security Force (UPSSF) Act, 2020] के तहत की जाएगी।
  • UPSSF का मुख्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में होगा और इस बल का प्रमुख एक ‘अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक’ (Additional Director General of Police) स्तर का अधिकारी होगा।
  • UPSSF में कल 9,919 सुरक्षा कर्मी होंगे।
  • प्रथम चरण में UPSSF के तहत पाँच बटालियनों का गठन प्रस्तावित किया गया है।
  • इन पाँच बटालियनों के गठन के लिये कुल अनुमानित व्यय भार (जिसमें वेतन भत्ते व अन्य व्यवस्थाएँ भी सम्मिलित हैं) लगभग 1,747  करोड़ रुपए बताया गया है।
  • UPSSF के अधिकारियों और अन्य सदस्यों की भर्ती उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती तथा प्रोन्नति बोर्ड द्वारा की जाएगी।
  • पहले चरण के तहत UPSSF के गठन हेतु राज्य सरकार द्वारा ‘प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी’ (Provincial Armed Constabulary- PAC) का सहयोग लिया जाएगा।  

कार्य क्षेत्र और शक्तियाँ: 

  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Industrial Security Force- CISF) की तरह ही UPSSF राज्य के महत्त्वपूर्ण सरकारी और निजी भवनों, और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिये ज़िम्मेदार होगा।
  • यह सुरक्षा बल प्रदेश में उच्च न्यायालय, ज़िला न्यायालयों, प्रशासनिक कार्यालय एवं परिसर व तीर्थ स्थल, मेट्रो रेल, हवाई अड्डा, बैंक अन्य वित्तीय, शैक्षिक संस्थान, औद्योगिक संस्थान आदि की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
  • निजी कंपनियाँ भी एक निश्चित शुल्क चुका कर इस बल की सेवाएँ ले सकेंगी हालाँकि इसके लिये राज्य के पुलिस महानिदेशक की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। 

पृष्ठभूमि:

  • दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश में न्यायालय परिसरों में हिंसक घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सभी ज़िला न्यायालयों में सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करने के लिये कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश दिये थे।
  • इसके तहत उच्च न्यायलय ने राज्य सरकार को 15 जनवरी, 2020 के पहले सभी ज़िला न्यायालयों में विशेष सुरक्षा बल की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और न्यायालय परिसर के चारों ओर चारदीवारी बनाने का निर्देश दिया था।

  • गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में बिजनौर ज़िले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में हुई गोलीबारी में  1 हत्या आरोपी सहित दो पुलिस कर्मियों और एक न्यायालय कर्मचारी की हत्या कर दी गई थी।

आलोचना:    

  • उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव के अनुसार, इस विशेष सुरक्षा बल के पास किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के या किसी वारंट के बिना भी किसी व्यक्ति की तलाशी लेने या उसे गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। 
  • गौरतलब है कि ‘केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968’ की धारा-11 के अनुसार, CISF का कोई भी सदस्य बिना किसी मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, जो किसी कर्मचारी (सार्वजनिक उद्यम या CISF की निगरानी में निजी उद्यम से संबंधित) या CISF के किसी सदस्य को स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, या स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का प्रयास करता है, या गलत तरीके से अपमान करने का प्रयास करता है या उसके कार्य में बाधा डालता है आदि।
  • साथ ही ‘केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968’ की धारा-12 के तहत कुछ मामलों में CISF के सदस्यों को बिना किसी मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के किसी व्यक्ति की तलाशी लेने की शक्ति भी प्राप्त है।
  • इस सुरक्षा बल को किसी मजिस्ट्रेट के आदेश के बगैर किसी व्यक्ति की तलाशी या गिरफ्तारी की शक्ति देने के संदर्भ में कई मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है। 

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

(Central Industrial Security Force- CISF):  

  • CISF का गठन ‘केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968’ के तहत 10 मार्च, 1969 को  किया गया था।
  • वर्तमान में CISF के तहत 12 रिज़र्व बटालियन हैं। 
  • CISF देशभर में स्थित औद्योगिक इकाइयों, सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं तथा अन्य प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करता है। 
    • इनमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र, खदान, आयल फील्ड और रिफाइनरियाँ, हवाई अड्डे , समुद्री बंदरगाह, बिजली संयंत्र, दिल्ली मेट्रो, और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आदि शामिल हैं।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस/दृष्टि

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