गंगा नदी की जैव विविधता

Comments · 128 Views

भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा गंगा नदी पर किये गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि नदी के 49 प्रतिशत हिस्से में उच्

गंगा नदी की जैव विविधता

 

प्रिलिम्स के लिये 

भारतीय वन्यजीव संस्थान, गंगा नदी और इससे संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

मेन्स के लिये 

गंगा नदी की जैव विविधता और उससे संबंधित चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा गंगा नदी पर किये गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि नदी के 49 प्रतिशत हिस्से में उच्च जैव विविधता मौजूद है।

KEY POINT - RAS Online Classes

प्रमुख बिंदु

  • सर्वेक्षण में पाया गया है कि बीते कुछ वर्षों में गंगा नदी की जैव विविधता में वृद्धि हुई है, जो कि गंगा नदी के अच्छे स्वास्थ्य और गिरते प्रदूषण स्तर का प्रमुख घोतक है। इस सर्वेक्षण में गंगा नदी की सहायक नदियों को शामिल नहीं किया गया था।
  • ध्यातव्य है कि गंगा और इसकी सहायक नदियाँ भारत के 11 राज्यों से होकर बहती हैं और देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 26.3 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं, किंतु गंगा नदी (जिसमें सहायक नदियाँ शामिल नहीं हैं) मुख्यतः पाँच राज्यों - उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है।
  • सर्वेक्षण के मुताबिक, लोगों के बीच यह गलत धारणा है कि गंगा में ऐसे कुछ क्षेत्र हैं जहाँ जैव विविधता नहीं है, जबकि अध्ययन में यह पाया गया है कि संपूर्ण गंगा नदी में जैव विविधता मौजूद है और तकरीबन 49 प्रतिशत हिस्से में जैव विविधता का स्तर काफी उच्च है।
    • उच्च जैव विविधता वाले संपूर्ण क्षेत्र में से तकरीबन 10 प्रतिशत क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों जैसे- उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य और बिहार में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य आदि के आस-पास स्थित है।
    • उच्च जैव विविधता वाले संपूर्ण क्षेत्र को छः हिस्सों में विभाजित किया गया है- देवप्रयाग से ऋषिकेश (61 किमी), मखदुमपुर से नरौरा (147 किमी.), भिटौरा से गाजीपुर (454 किमी.), छपरा से कहलगाँव (296 किमी.), साहिबगंज से राजमहल (34 किमी.) और बहरामपुर से बराकपुर (246 किमी.)।
  • सर्वेक्षण में पाया गया है कि कई प्रमुख जलीय जीव और उनकी प्रजातियाँ जो कुछ वर्ष पूर्व गायब हो गई थीं,अब पुनः गंगा नदी में पाई जाने लगी हैं।
    • सीबोल्ड (Seibold), जो कि पानी के साँप की एक प्रजाति है, तकरीबन 80 वर्ष पूर्व गायब हो गई थी, किंतु अब इसे गंगा नदी में पुनः देखा जा सकता है।
    • इंडियन स्कीमर (Indian Skimmer), जो कि जलीय पक्षी है, को भी गंगा नदी में कई वर्ष बाद देखा गया है। 
    • कई अन्य जलीय प्रजातियाँ, गंगा नदी की सहायक नदियों से मुख्य नदी की ओर आ रही हैं, जो कि स्पष्ट तौर पर जल की गुणवत्ता में सुधार का एक संकेत है। 

सर्वेक्षण संबंधी मुख्य बिंदु

  • यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से किया जा रहा है, जो जलशक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू की गई प्रमुख परियोजनाओं में से एक है। इस सर्वेक्षण का पहला चरण वर्ष 2017-2019 के बीच था।
  • इस सर्वेक्षण के दौरान गंगा नदी की जैव विविधता का अध्ययन करने के लिये कुछ प्रमुख जलीय और अर्द्ध-जलीय प्रजातियों जैसे कि गंगेटिक डॉल्फिन, घड़ियाल, ऊदबिलाव, कछुए और विभिन्न प्रजातियों के जल पक्षियों आदि का एक संकेतक के रूप में प्रयोग किया गया है।

गंगा नदी और उसकी जैव विविधता

  • गंगा नदी एशिया की सबसे बड़ी और प्रमुख नदियों में से एक है, जो कि उत्तराखंड के गोमुख से लेकर बंगाल की खाड़ी तक लगभग 2,500 किलोमीटर तक बहती है और भारत के तकरीबन 26 प्रतिशत (8,61,404 वर्ग किमी.) भू-भाग को कवर करती है।
  • इस नदी की महत्ता को इसी बात से समझा जा सकता है कि यह देश की लगभग 43 प्रतिशत जनसंख्या (2001 की जनगणना के अनुसार 448.3 मिलियन) को सहायता प्रदान करती है।
  • गंगा नदी को विभिन्न प्रकार की दुर्लभ जलीय प्रजातियों का घर माना जाता है, इसमें गंगेटिक डॉल्फिन, ऊदबिलाव, घड़ियाल, दलदली मगरमच्छ, एस्टुरीन मगरमच्छ और कछुए आदि शामिल हैं। इसके अलावा इस नदी में मछलियों की अलग-अलग 143 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

Ganga-river

चुनौतियाँ

  • तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, जीवन के निरंतर ऊँचे होते मानकों तथा औद्योगीकरण और शहरीकरण आदि ने भारत समेत विश्व भर के जल संसाधनों विशेष रूप से नदियों को काफी अधिक प्रभावित किया है, गंगा नदी भी इससे अछूती नहीं रह सकी है।
  • कई अध्ययनों में सामने आया है कि जल की गुणवत्ता में गिरावट के कारण गंगा नदी का जल कई क्षेत्रों  में बुनियादी उपयोग के लिये भी उपयुक्त नहीं रह गया है। 
  • बाँध और बैराज के निर्माण तथा बालू खनन आदि के कारण गंगा नदी की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है, जिससे नदी को जैव विविधता के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। 

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)

  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) राष्ट्रीय गंगा परिषद की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता है, जिसे अगस्त 2011 को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया था।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के प्रमुख कार्यों में राष्ट्रीय गंगा परिषद के कार्यक्रम को क्रियान्वित करना, विश्व बैंक द्वारा समर्थित गंगा नदी घाटी परियोजना का क्रियान्वयन और ऐसे समस्त कार्य करना जो राष्ट्रीय गंगा परिषद के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये आवश्यक हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस/दृष्टि

Comments