अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: स्थगित करना संभव नहीं

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हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह सुझाव कि नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को कुछ स

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: स्थगित करना संभव नही

प्रीलिम्स के लिये

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

मेन्स के लिये

अमेरिका में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी विभिन्न प्रावधान और भारत से उनकी तुलना

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह सुझाव कि नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को कुछ समय के लिये टाला जा सकता है, राष्ट्रपति के इस सुझाव के साथ एक नया विवाद शुरू हो गया है।

प्रमुख बिंदु

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि देश में 3 नवंबर को आयोजित होने वाले चुनावों में तब तक देरी हो सकती है, जब तक आम मतदाता सुरक्षित रूप से मतदान नहीं कर सकते।
  • ऐसे में यह प्रश्न चर्चा में आ गया है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को देश में होने वाले चुनाव स्थगित करने का अधिकार है अथवा नहीं?

इस संबंध में अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार

  • अमेरिकी कानूनों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनाव स्थगित करने का अधिकार नहीं है।
  • अमेरिकी संविधान के अनुसार, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों की तारीख राष्ट्रपति नहीं, बल्कि अमेरिकी काॅॅन्ग्रेस द्वारा तय की जाती है।
  • 25 जनवरी, 1845 को अनुमोदित एक संघीय कानून ने स्पष्ट रूप से चुनाव का समय निर्धारित किया है, निर्वाचक मंडल के चयन का ज़िक्र करते हुए संघीय कानून में कहा गया है कि ‘राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव हेतु निर्वाचकों को प्रत्येक अमेरिकी राज्य में उस वर्ष नवंबर माह के पहले सोमवार के बाद आने मंगलवार को नियुक्त किया जाएगा, जिस वर्ष राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति की नियुक्ति की जानी है।
    • कानून के अनुसार, इस वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति के लिये निर्वाचक मंडल का चयन 3 नवंबर को किया जाएगा।
  • हालाँकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी इस कानून को एक नया कानून पारित करके बदला जा सकता है, जिसे अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव (House of Representatives) और सीनेट (Senate) दोनों की मंज़ूरी की आवश्यकता है, साथ ही इस नए कानून को न्यायालय के समक्ष चुनौती भी दी जा सकेगी।

क्या होगा यदि चुनाव स्थगित हो जाते हैं तो?

  • हालाँकि चुनाव स्थगित होने की संभावना काफी कम है, किंतु यदि अमेरिका का नीति निर्माता कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनज़र राष्ट्रपति के चुनावों को कुछ समय के लिये टालने का निर्णय भी लेते हैं तो भी अमेरिकी नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल की अवधि से ज़्यादा व्हाइट हाउस में बतौर राष्ट्रपति कार्य नहीं कर सकेंगे।
    • विदित हो कि राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी, 2021 को समाप्त हो रहा है।
  • 23 जनवरी, 1933 को अमेरिकी संविधान में 20वाँ संविधान संशोधन किया गया था जिसके अनुसार, किसी भी स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का कार्यकाल चुनाव न होने की स्थिति में उनकी राष्ट्रपति अवधि की समाप्ति के बाद 20 जनवरी की शाम को समाप्त हो जाएगा।
    • इस तिथि में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
  • आमतौर पर, यदि राष्ट्रपति पद खाली होता है, तो उपराष्ट्रपति पदभार ग्रहण करता है, किंतु इस स्थिति में चुनाव न होने कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति माइक पेंस (Mike Pence) दोनों का कार्यकाल 20 जनवरी को समाप्त हो जाएगा।
    • ऐसे में कानून के अनुसार, हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव (House of Representatives) का अध्यक्ष नए राष्ट्रपति के चुनाव तक पदभार संभालेगा।
  • हालाँकि यहाँ भी एक समस्या है, अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव का दो वर्ष का कार्यकाल 3 जनवरी, 2021 को समाप्त हो रहा है। यह तारीख भी 20वें संविधान संशोधन में ही तय की गई थी। इस प्रकार हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव का अध्यक्ष पदभार ग्रहण कर सकता है।
  • नियमों के अनुसार, हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव का अध्यक्ष मौजूद नहीं है तो अगला स्थान अमेरिकी सीनेट (Senate) के प्रेसिडेंट प्रो टेंपोर (President Pro Tempore) का होता है।
    • यह सीनेट में दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पद होता है, हालाँकि यह पद काफी हद तक औपचारिक ही माना जाता है।
    • अमेरिकी संविधान के अनुसार, सीनेट को अमेरिकी उपराष्ट्रपति की अनुपस्थिति में एक  प्रेसिडेंट प्रो टेंपोर (President Pro Tempore) का चयन करना चाहिये।

अमेरिका में चुनाव का नया माध्यम

  • अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों की तारीख तो संघीय कानून के माध्यम से चुनी जाती है, किंतु चुनाव में मतदान की प्रक्रिया राज्यों के स्तर पर निर्धारित की जाती है।
  • इसलिये राज्यों के स्तर पर चुनाव मतदान की प्रक्रिया काफी जटिल बनी हुई है, जहाँ कुछ राज्यों ने मेल-इन वोटिंग (पोस्टल वोटिंग) का तरीका अपनाया है वहीं कुछ राज्यों ने व्यक्तिगत रूप से मतदान का तरीका अपनाया है, इसके अलावा कई अन्य राज्यों ने मतदान के अलग-अलग तरीके अपनाए हैं।
  • नियमों के अनुसार, जिनके पास कोई निश्चित पता नहीं है वे या तो व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकते हैं या अपने स्थानीय चुनाव अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: द हिंदू

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